अपने comfort-zone में मशरूफ हूँ, क्यों की यहाँ में फ़ैल नहीं होता,

दुनिया को अपनी व्यस्तता बताकर, बड़ी तस्सली से हूँ में सोता |

नयी कोशिश से डरता हूँ, इसलिए लोगो को बताने के लिए बहाने तैयार होते हैं,

दुसरो की सफलता को किस्मत बताकर, मेरे अपने जलवे और अंदाज़ होते हैं |



छोटी-छोटी सी उपलब्धियों में मदहोश सा हो जाता हूँ,

यहाँ सब कुछ अस्थाई है, जानकर भी अनजान सा बन जाता हूँ |



हाँ, अंदर ही अंदर थोड़ा सा घबराता हूँ,

रोज एक सी जिंदगी तो आखिर, मेँ भी नहीं जीना चाहता हूँ |



तो आज मेँ एक नया कदम बढ़ा रहा हूँ,

अपने आलस्य और डर को अब अलविदा कहने जा रहा हूँ |


चुनौती और विपरीत परिस्थ्तियों का सामना करना मुझे स्वीकार हैं,

पर बिना कुछ करे ही मर जाना, ये नहीं मेरे संस्कार हैं |


हार नहीं मानूंगा, कोशिश करता ही जाऊंगा,

विफल भी हो गया तो क्या, खुद से तो नज़रे मिला पाऊंगा ।